Writer Cop
Wednesday, October 7, 2009
एहसान तेरा होगा मुझ पे
कहीं दूर जब दिन ढल जाए
इक हसीं शाम को दिल मेरा खो गया
घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं
Tuesday, October 6, 2009
इक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
हुए हैं तुम पे आशिक हम
दिल के झरोखे मैं तुझको बिठा कर
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